तक़दीर का बँटवारा - रामधारी सिंह दिनकर की कविता
Ramdhari Singh Dinkar Ki Kavita है बँधी तक़दीर जलती डार से, आशियाँ को छोड़ उड़ जाऊँ कहाँ? वेदना मन की सही जाती नहीं,…
September 23, 2021
Ramdhari Singh Dinkar Ki Kavita है बँधी तक़दीर जलती डार से, आशियाँ को छोड़ उड़ जाऊँ कहाँ? वेदना मन की सही जाती नहीं,…
Mr. Parihar
September 23, 2021
कवि रबीन्द्रनाथ टैगोर उन विरल साहित्यकारों में से एक हैं, जिनके साहित्य और व्यक्तित्व में अद्भुत साम्य है। रवीन्द्रनाथ …
Mr. Parihar
September 20, 2021
सम्पूर्ण जन गण मन | राष्ट्रीय गान हिंदी में लिखा हुआ जन गण मन अधिनायक जय हे राष्ट्रीय गान हिंदी में जन गण मन अधिनायक …
Mr. Parihar
September 18, 2021
हिंदी दिवस पर कविता हिंदी इस देश का गौरव है, हिंदी भविष्य की आशा है हिंदी हर दिल की धड़कन है, हिंदी जनता की भाषा है इस…
Mr. Parihar
September 14, 2021
Mahadevi Verma Ki Kavita : In Ankho ne dekhi na rah kahin इन आँखों ने देखी न राह कहीं इन्हें धो गया नेह का नीर नहीं, …
Mr. Parihar
September 11, 2021
Gopaldas Neeraj ki Kavita : मैं तुम्हें अपना बनाना चाहता हूं अजनबी यह देश, अनजानी यहां की हर डगर है, बात मेरी क्या- यह…
Mr. Parihar
September 09, 2021
चाहे बोलो, चाहे धीरे-धीरे बोलो, स्वगत गुनगुनाओ, चाहे चुप रह जाओ' सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन उर्फ ‘अज्ञेय’ की कव…
Mr. Parihar
September 09, 2021
Dashrath Vilap : भारतेंदु हरिश्चंद्र की कविताएं कहाँ हौ ऐ हमारे राम प्यारे । किधर तुम छोड़कर मुझको सिधारे ।। बुढ़ापे म…
Mr. Parihar
September 08, 2021
Subhadra Kumari Chauhan ki Kavita : कदंब का पेड़ कविता यह कदंब का पेड़ अगर माँ होता यमुना तीरे। मैं भी उस पर बैठ कन्ह…
Mr. Parihar
September 04, 2021
संध्या सुन्दरी - सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की कविताएँ दिवसावसान का समय - मेघमय आसमान से उतर रही है वह संध्या-सुन्दरी…
Mr. Parihar
August 30, 2021
वन बेला - सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की कविताएँ वर्ष का प्रथम पृथ्वी के उठे उरोज मंजु पर्वत निरुपम किसलयों बँधे, पिक…
Mr. Parihar
August 30, 2021
वे आँखें - सुमित्रानंदन पंत की कविताएँ अंधकार की गुहा सरीखी उन आँखों से डरता है मन, भरा दूर तक उनमें दारुण दैन्य दु…
Mr. Parihar
August 29, 2021
संध्या के बाद - सुमित्रानंदन पंत की कविताएँ सिमटा पंख साँझ की लाली जा बैठी तरू अब शिखरों पर ताम्रपर्ण पीपल से, शतमु…
Mr. Parihar
August 29, 2021
नौका-विहार - सुमित्रानंदन पंत की कविताएँ शांत स्निग्ध, ज्योत्स्ना उज्ज्वल! अपलक अनंत, नीरव भू-तल! सैकत-शय्या पर दुग्…
Mr. Parihar
August 29, 2021
ग्राम श्री - सुमित्रानंदन पंत की कविताएँ फैली खेतों में दूर तलक मख़मल की कोमल हरियाली, लिपटीं जिससे रवि की किरणें चा…
Mr. Parihar
August 29, 2021
यह धरती कितना देती है - सुमित्रानंदन पंत की कविताएँ मैंने छुटपन में छिपकर पैसे बोये थे, सोचा था, पैसों के प्यारे पेड़ …
Mr. Parihar
August 29, 2021
मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ - शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की कविताएँ मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ। चल रहा हूँ,…
Mr. Parihar
August 29, 2021
चल रही उसकी कुदाली - शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की कविताएँ हाथ हैं दोनों सधे-से गीत प्राणों के रूँधे-से और उसकी मूठ में, वि…
Mr. Parihar
August 29, 2021
मेरा देश जल रहा, कोई नहीं बुझानेवाला - शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ की कविताएँ घर-आंगन में आग लग रही। सुलग रहे वन -उपवन, दर दी…
Mr. Parihar
August 29, 2021
मेरे नगपति! मेरे विशाल! - रामधारी सिंह दिनकर की कविताएँ मेरे नगपति! मेरे विशाल! साकार, दिव्य, गौरव विराट, पौरुष के पुन…
Mr. Parihar
August 28, 2021